
जानें लोहड़ी के शुभ मंत्र, उनके अर्थ, जप विधि और इस पावन अग्नि पर्व से जुड़ी धार्मिक मान्यताएँ, जिससे आपकी लोहड़ी हो मंगलमय।
लोहड़ी का पर्व सूर्य और अग्नि देव से जुड़ा हुआ माना जाता है, जिसमें लोक परंपराओं के साथ पूजा और जप का विशेष महत्व होता है। इस लेख में जानिए लोहड़ी पर्व में पढ़े जाने वाले प्रमुख मंत्र एवं इस पर्व का शुभ समय।
लोहड़ी हर वर्ष उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला प्रमुख पर्व है, जो नई फसल, प्रकृति और सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता प्रकट करता है। मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पूर्व आने वाला यह त्योहार विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा में अलग ही रौनक बिखेर देता है। वहीं, दिल्ली सहित देश के कई अन्य क्षेत्रों में भी लोहड़ी को खास श्रद्धा, उमंग और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है।
ॐ नित्यानन्दाय नमः।
ॐ निखिलागमवेद्याय नमः।
ॐ दीप्तमूर्तये नमः।
ॐ सौख्यदायिने नमः।
ॐ श्रेयसे नमः।
ॐ श्रीमते नमः।
ॐ अं सुप्रसन्नाय नमः।
ॐ ऐं इष्टार्थदाय नमः।
ॐ सम्पत्कराय नमः।
ॐ हिरण्यगर्भाय नमः।
ॐ तेजोरूपाय नमः।
ॐ परेशाय नमः।
ॐ नारायणाय नमः।
ॐ कवये नमः।
ॐ सूर्याय नमः।
ॐ सकलजगतांपतये नमः।
ॐ सौख्यप्रदाय नमः।
ॐ आदिमध्यान्तरहिताय नमः।
ॐ भास्कराय नमः।
ॐ ग्रहाणांपतये नमः।
ॐ वरेण्याय नमः।
ॐ तरुणाय नमः।
ॐ परमात्मने नमः।
ॐ हरये नमः।
ॐ रवये नमः।
ॐ अहस्कराय नमः।
ॐ परस्मै ज्योतिषे नमः।
ॐ अमरेशाय नमः।
ॐ अच्युताय नमः।
ॐ आत्मरूपिणे नमः।
ॐ अचिन्त्याय नमः।
ॐ अन्तर्बहिः प्रकाशाय नमः।
ॐ अब्जवल्लभाय नमः।
ॐ कमनीयकराय नमः।
ॐ असुरारये नमः।
ॐ उच्चस्थान समारूढरथस्थाय नमः।
ॐ जन्ममृत्युजराव्याधिवर्जिताय नमः।
ॐ जगदानन्दहेतवे नमः।
ॐ जयिने नमः।
ॐ ओजस्कराय नमः।
ॐ भक्तवश्याय नमः।
ॐ दशदिक्संप्रकाशाय नमः।
ॐ शौरये नमः।
ॐ हरिदश्वाय नमः।
ॐ शर्वाय नमः।
ॐ ऐश्वर्यदाय नमः।
ॐ ब्रह्मणे नमः।
ॐ बृहते नमः।
ॐ घृणिभृते नमः।
ॐ गुणात्मने नमः।
अग्नि के माध्यम से ईश्वर को नमन कर कृतज्ञता प्रकट करने के लिए.
प्रकृति और अन्नदाता फसल के प्रति धन्यवाद भाव व्यक्त करने हेतु.
वातावरण से नकारात्मकता हटाकर शुभ ऊर्जा के संचार के लिए.
जीवन में समृद्धि, आरोग्य और खुशहाली की कामना के लिए.
परिवार, समाज और आने वाले समय के कल्याण हेतु.
लोहड़ी की पूजा 13 जनवरी 2026 को सूर्यास्त के बाद करना विशेष शुभ माना जाता है। संध्या के समय, विशेषकर लगभग 5:45 बजे के बाद गोधूलि मुहूर्त (करीब 5:42 PM से 6:09 PM) और उसके पश्चात का काल अत्यंत उत्तम होता है। इस दौरान अग्नि प्रज्वलित कर उसकी परिक्रमा की जाती है तथा गुड़, रेवड़ी और मूंगफली आदि अर्पित की जाती हैं। मान्यता है कि इस विधि से पूजा करने पर जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
अग्नि देव के मंत्र (परिक्रमा के दौरान)
ॐ सती शांभवी शिव प्रिये स्वाहा' (108 बार जाप)
ॐ अपांपतये वरुणाय नमः' (कलश पूजा के लिए)
विष्णु मंत्र
सुख और समृद्धि की कामना के लिए होलिका दहन की रात्रि में “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः” का जप किया जाता है।
संतान प्राप्ति हेतु
परिक्रमा पूर्ण होने के बाद “ॐ देवकीनंदन गोविंद वासुदेव, जगदीश्वर देहि मे सुतम्, कृष्ण त्वं शरणं मम” मंत्र का उच्चारण शुभ माना जाता है।
मंगल दोष शांति के लिए
मंगल ग्रह की बाधा दूर करने हेतु 21 परिक्रमा करते हुए “ॐ अं अंगारकाय नमः” मंत्र का जप किया जाता है।
पावन अवसरों पर आस्था के साथ किए गए मंत्र जप और धार्मिक अनुष्ठान जीवन में शुभता और सकारात्मकता लाते हैं। ऐसे कर्म न केवल मानसिक शांति प्रदान करते हैं, बल्कि समृद्धि, पारिवारिक संतुलन और ग्रह दोषों के प्रभाव को शांत करने में भी सहायक माने जाते हैं।
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